हमन कहिथन भगवान ग तोला किसान!
चिरहा कुरथा तोर,सुग्घर मोर परिधान!!
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तंय भुख अउ प्यास रहिके अन्न ल उपजाथस!
खाथस बासी ग,अउ हमला रंग रंग के खवाथस!!
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कब जागही भगवान तोर स्वंय के भाग !
तंय ह जगाथस हम सबो के सुंदर भाग!!
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बिचारत हावय दाई तोर देख तोर कुरथा ल !
ए दरी के फसल म भगाबोन हम गरीबी ल!!
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जिम्मा हावय ग भगवान,जग के,तोर कंधा म!
लूट डरीस तोला जम्मो दलाल अपन धंधा म!!
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तंय भगवान हमर जीवन के दुख के हरइया!
तोर सुख के आज कोन हावय सुध करइया!!
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