आंसुओं में अपने दर्द काे , छुपा ना सके,
अंदर से कुछ और थी तुम बाहर कुछ और,
तेरी तरह खुद को, हम कभी बना ना सके ,
नहीं मांगा था साथ मैंने उमर भर के लिए,
चार दिन की दाेस्ती भी तुम निभा ना सके,
तुमने तो कभी मुझे याद ही नहीं किया,
और एक हम हैं जो तुम्हे भुला ना सके,
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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