नाक के नथनी अउ तोर कान के बाली nak ke nathni au tor kan ke bali-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

नाक के नथनी अउ तोर कान के बाली।
बड़ सुरता आथे वो तोर होठ के लाली।



मीठ मीठ बोली , कोईली के जईसन ,
देखेवं मै तोला तो लागे तैं दिलवाली ।



हिल झुल के रेंगना ,हिरनी के जइसन ,
लचके कमरिया जइसे फुल के डाली ।



जिनगी मा रानी रे , अगोरा हावय तोर ।
आजा ना गोरी रे ,  दिल  हे मोर खाली ।


देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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