** खपरा उलटाई : एक परिचय अउ महत्ता*
छत्तीसगढ़ अउ मध्य भारत के ग्रामीण संस्कृति म 'बरसात के पहिली घर के खपरा उलटाई…
छत्तीसगढ़ अउ मध्य भारत के ग्रामीण संस्कृति म 'बरसात के पहिली घर के खपरा उलटाई' (घर के खपरैल संवारना) सिरिफ़ एकठो काम नोहे, बल्कि एहा एक बड़े परंपरा, उ…
Read more »कड़कती धूप में जलती वसुधा, अंगारों की सेज बनी है। प्यास से व्याकुल छोटी गौरैया, मौत की दहलीज पे तनी है। कण्ठ कुम्हलाया, काया …
Read more »विषय -रक्तदान , थैलेसीमिया बच्चों को जीवनदान. रक्तदान: महादान [विधाता छंद-तोषण कुमार चुरेन्द्र ] किया जो दान जीवन का , वही इंसान होता है। लहू क…
Read more »हाय दौना पान... का:- खोपा मा खोंचे रे हाय दौना पान ले डारे जान मोर तोर मुस्कान का जादू डारे तैं, मन मोही डारे तै कारी संवरेंगी तोर उमर नदान.... की:- गुरतुर बोल…
Read more »सुवागीत तरी हरी नाहना मोर नाहना सुवा ना रे छंइया होगे निरदइया छोंड़ के गये परदेशी सुवा ना रे छंइया होगे निरदइया बाहर बटोरेंव मैं अंगना लिपाऐंव ओ सजना मोर आह…
Read more »*तोर मया मा मँय हँव दिवाना* नाँव ल लेके मँय मर जाहूँ , छोड़ मोला जब जाबे तँय। तोर मया मा मँय हँव दिवाना , पाछू फेर पछताबे तँय। पानी बिना मछरी कहाँ जाहूँ , झि…
Read more »दिनांक १७-०१-२२ सोमवार चित्राभिव्यक्ति विधा स्वैच्छिक दान धर्म करते रहिए,यही जगत से नाता है। जो देता है दान सभी को,सब कुछ मग पे पाता है। हर घर से जब दान मिले ह…
Read more »छत्तीसगढ़ अउ मध्य भारत के ग्रामीण संस्कृति म 'बरसात के पहिली घर के खपरा उलटाई…
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