आंखी मा काजर लगाए गाेरी ankhi ma kajar lagay gori-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

आंखी मा काजर लगाए गाेरी,
               नैना बान चलाए गाेरी ।
मन मतौना मात गे संगी,
          हलु हलु जब मुस्काए गाेरी ।।



रूप तोर सोनहा खदान हे,
अउ मोती कस मुस्कान हे,
लाहुं तोला बनाके दुल्हिन ।
बिन तोर अब न रहाए गाेरी ।।
आंखी मा काजर..............!



चेहरा झुलय तोर नैना नैना,
दिन बिते न बिते मोर रैना ,
तोर सलोनी रूप छोड़ के ,
दुसर कोनो नइ भाए गाेरी ।
आंखी मा काजर...............!



तोर से मोला लागे हे पिरिया,
करले भरोसा खवाले किरिया,
आके मोला लगाले ना छतिया,
काबर हावस तैं रिसाए गाेरी ।
आंखी मा काजर................!


         देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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