नैना बान चलाए गाेरी ।
मन मतौना मात गे संगी,
हलु हलु जब मुस्काए गाेरी ।।
रूप तोर सोनहा खदान हे,
अउ मोती कस मुस्कान हे,
लाहुं तोला बनाके दुल्हिन ।
बिन तोर अब न रहाए गाेरी ।।
आंखी मा काजर..............!
चेहरा झुलय तोर नैना नैना,
दिन बिते न बिते मोर रैना ,
तोर सलोनी रूप छोड़ के ,
दुसर कोनो नइ भाए गाेरी ।
आंखी मा काजर...............!
तोर से मोला लागे हे पिरिया,
करले भरोसा खवाले किरिया,
आके मोला लगाले ना छतिया,
काबर हावस तैं रिसाए गाेरी ।
आंखी मा काजर................!
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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