काबर तै टुरी kabar tai turi [Krishna parkar][Chhattisgarhi kavita][hindi kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][छत्तीसगढ़ी कविता][हिंदी कविता][कविता]

काबर तै टुरी गोठ बात छोड़ दिए ।
मोर बर मुश्किल हलात छोड़ दिए ।



का मोर गलती हे अतके बतादे ।
फेर चाहे मोला तै फांसी चढ़ादे ।

काबर अचानक तै साथ छोड़ दिए ।
मोर बर मुश्किल हलात छोड़ दिए ।



मन मंदिर मा तोला बईठा के ।
पूजा करेवं मै देंवता बना के ।

मंदिर के दिया , बुझात छोड़ दिए ।
मोर बर मुश्किल हलात छोड़ दिए ।



पुन्नी के चंदा जानेवं मै तोला ।
जान से जादा मानेवं मै तोला ।

फेर काबर तै मोर हाथ छोड़ दिए ।
मोर बर मुश्किल हलात छोड़ दिए ।


काबर तै टुरी, kabar tai turi,Krishna parkar,Cg kavita,hindi kavita, कृष्णा पारकर,छ.ग कविता,हिंदी कविता,कविता,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ