महतारी
सरग घलो लजा जाही,
महतारी के कोरा ले।
छप्पन भोग बेकार हे दाई,
तोर बासी वाले कटोरा ले।।
काँटा गड़थे पाँव मा मोर,
पीरा तोला जनाथे ओ।
लइका के मुस्कान देख के,
तोर, दुख पीरा भुलाथे ओ।।
दुख घलो नंदा जथे,
दाई तोर जोरा ले....
तोर जुठा कौंरा मोर बर दाई
अमृत ले भारी हे।
देबी देवता के आसीस बरोबर,
मया के तोर गारी हे।।
मोर खजानी बर तोर खजाना,
निकलथे चुकिया पोरा ले...
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