जो लइका के ख़ुशी बर पल पल रोथे,
माँ ले बड़के दुनिया म कौन होथे।।
सूखा मा सोवाके , गिला में खुद सोथे।।
आखिर माँ ले बड़के दुनिया मा कौन होथे।।
अपन लइका ला, बचाये खातिर
कुकुर संग सूरा लड़ जाथे
अपन लइका ला बचाये खातिर
बाज कस कूकरी उड़ जाथे
तुमन बताओ संगवारी
माँ के बिना कौन दुनिया में आथे।।
माँ खुद भूखे रही रही परिवार के पेट ला भरथे,
सादा पानी पीके, खायेव पेट भर कहिथे।।
थोकिन जर धरे लइका ल, अब्बड़ चिंता करथे
का हिसाब बताओ वो दर्द के, जो
लईका के जिनगी खातिर , माँ कतको मरथे
माना पिता बिन जिनगी अंधियार हे ,
लेकिन माँ बीन जिनगी ल धिक्कार हे
माना पिता के तपस्या घलो अनमोल हे
फेर माँ बिना जिनगी बेमोल हे
बाबू अगर चांदी ता माँ मोर सोन हे
जिनगी नीरस हे माँ अगर मौन हे
ये दोनों के बिना जिनगी का,
माँ के बगैर मार के खवईया कौन हे
दुःख ला अब्बड़ उठा के लइका ल लायक बनाथें।
अउ वही लईका ह माँ बाप ल अनाथालय ले जाथे।।
बाबू खुद चिरहा पहिर के बेटा ल अच्छा अच्छा पहिराथे।
लायक जब होथे बेटा ह ,अपन के माँ बाप ल दुरिहाथे।।
जिनगी ल तपा के माँ बाप ,अपन लईका मन बर कमाथे।
पारी आथे जब पोसे ल माँ बाप के , लईका मुँहु लुकाथे
माँ चाँद हे माँ सुरुज माँ हिरा मोती अउ सोन होथे
माँ ले बड़के आखिर दुनिया में कौन होथे
💐💐💐💐💐आर्यन चिराम💐💐💐💐💐



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