बोले मा लाज लागय,
गोठियाबे त चारी हे।।
इस्कूल अस्पताल ठेका मा,
अउ भट्ठी ह सरकारी हे।।
भष्टाचार के हाँका पार के,
बिपक्षी करथे हउव्वा।।
चुनाव जीते के एके चारा,
बाँट दे तैंहा पउव्वा।।
बिकास जाए चुल्हा तरि,
जनता चेपटी मा अभारी हे।।
बोले मा लाज लागय,
गोठियाबे त चारी हे।।
इस्कूल अस्पताल ठेका मा,
अउ भट्ठी ह सरकारी हे।।
रुपिया वाले चाँउर बेंच के,
बड़ अँटियावत समारू हे।।
बाई के अँइठी खिनवा सँग थारी लोटा ,
बेच के पिगे दारू हे।।
गउँटीया होगे पउव्वा छाप,
महिला कमान्डो ओखर नारी हे।।
बोले मा लाज लागय,
गोठियाबे त चारी हे।।
इस्कूल अस्पताल ठेका मा,
अउ भट्ठी ह सरकारी हे।।
समारू के मन मा भोक्का लाड़ू,
थोथना मा इस्माईल हे।।
महीना भर बर होगे जुगाड़,
मिलईया,फोकट मा मोबाईल हे।।
डउकी लइका ला खूब कुचरथे,
देथे अड़बड़ गारी हे।।
बोले मा लाज लागय,
गोठियाबे त चारी हे।।
इस्कूल अस्पताल ठेका मा,
अउ भट्ठी ह सरकारी हे।।
धान कटोरा ह,
दारू के कोटना कहावय झन।।
बड़ सुग्घर हमर संस्कृति ह,
नशा के चिखला म सनावय झन।।
आघू बढ़के फोड़ दव शीशी,
सुधरे के इही बारी हे।।
बोले मा लाज लागय,
गोठियाबे त चारी हे।।
इस्कूल अस्पताल ठेका मा,
अउ भट्ठी ह सरकारी हे।।
प्रेषक:-आर्यन चिराम


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