अखिल भारतीय आदिवासी हल्बा—हल्बी समाज छत्तीसगढ़

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हल्बा क्रांति १७७४-१७७९ // halba kranti 1774-1779

Posted: 30 Jul 2020 05:12 AM PDT

बस्तर के प्रथम विद्रोह हल्बा क्रांति 1774-1779, आर्यन चिराम, bastar ke pratham vidroh halba kranti 1774-1779, aaryan chiram

बस्तर के प्रथम विद्रोह हल्बा क्रांति के बारे में आज तक आप लोग केवल संक्षिप्त में पढ़े होंगे परन्तु आज मै आप लोगों को विस्तृत जानकारी देने वाला हूँ हल्बा विद्रोह 1774-1779 के बारे में तो आप लोगो को इस विद्रोह से जोड़ने से पहले कुछ इतिहास की ओर ले चलता हूँ फिर धीरे धीरे विषय में जोड़ते ले जाऊंगा तो शुरू करते है हल्बा विद्रोह के बारे में जानना 
अन्नमदेव ने नाग राज्य के हदयस्थल बारसूर व 

"गादीपखना" के नाम से


18 खास-खास हल्बा परिवारों से योद्धा नियुक्त करते थेवे थे अंतागढ़नारायणपुर


छिंदगढ़,

बड़े डोंगरछोटे डोंगरबारसूरबीजापुरजैतगिरीभैरमगढ़मरदापालमाडपालसिहावा और वृन्दानवागढ़
आदि ।

काकतीय शासक प्रतापदेव (1501 - 1524 ई.) 

" दलपत देव की सात रानियां थी। बड़ी रानी रामकुंवर कांकेर राजपरिवार से आई थीउसके पुत्र का नाम अजमेर सिंह थातीसरी रानी कुसुम कुंवर थी
जिसके पुत्र दरियाव देव था


जो कि दलपत देव के सभी
लोकगीतों में भी देखने को मिलती है-
निमारे वे के दातोन खनानिडोरि बूमि
दातोन दादाले
बूमि दुकार दुकार रोय दादालेबूमि ते दुकार
अरितरोय दादाले
हिकाल हुरो भइसो रोय दादालेसरपरने
भाइसो अरित रोय दादाले
पोदोर पुंगार रोय दादालेसरपने दोयो अरतु
रोय दादाले,
पुहले देलात खनात रोय दादालेवेतले मराते
कवराल रोय दादाले.
कवर बोकर इन्त रोय दादालेरइयक रेवोन
कवराल रोय दादा ले।

दरियावदेव ने जयपुर राजा के साथ एक

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जिसके अनुसार उन्हें बस्तर केपाड़चुरचुंडापोड़ागढ़ओमरकोट य रायगढ़ा
सैनिक सहायता के बदले जयपुर को देना था।"
मुरिया लोक गीत में मिलता है-




मुलिर-मुलिर इन्तोनी कारी गुटी अगादा
मुलिर कारी गुर्टी।
रइनीगढ़ दा मुलिर दादाहुरिंग मुलिर दादा
डोंगर कयांग तरवार दादाहोरमेण्ड
टोरमेण्डपूजा रोय कारी गुर्टी,
मिण्डाक टोरा रेयन्दु रोय कारी गुर्टी लुकर
मीनुकुलनाह रोय कारी गुर्टी।
बारि मीनु तन्नाह रोय कारी गुर्टी मुलिर
मुलिर
इन्तोनी कारी गुर्टी।

"ताड़ झोकनी"
के नाम से याद करते है। बड़े डोंगर के एक शिलालेख से
हल्बा क्रांति के असफलता के कारण
हल्बा क्रांति के असफलता का मुख्य कारण कांकेर राजा का रुष्ट होना व हल्बा सैनिको को राजा अजमेर सिंह द्वारा नजरंदाज किया जाना प्रमुख है जब वे माडिया सैनिको को भरती किया तो एक बार भी हल्बा सेनापतियो से राय मसौरा नही लिया जो हल्बा सैनिको को नागावार गुजरा और यह हार का प्रमुख कारण बना क्योकि जिन माडिया सैनिको की भर्ती राजा द्वारा किया जा रहा था वे बड़े डोंगर राजधानी के खिलाफ थे

निष्कर्ष


लेखक
आर्यन चिराम
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सन्दर्भ:-
बस्तर इतिहास एवं संस्कृति:- लाला जगदलपुरी (मध्य पदेश हिंदी ग्रन्थ अकादमी )
बस्तर का मुक्ति संग्राम:- डॉ शुक्ला
शोध पत्र बस्तर के डोंगर क्षेत्र में हल्बा विद्रोह:- डिश्वर नाथ(पं. रविशंकर शुक्ल वि.वि रायपुर)
बस्तर संबंधित अन्य विद्रोह

1. हल्बा विद्रोह 1774 1779 ई.तक

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