बइठे पीपर के छांव मा [कृष्णा परकार][ कविता]baithe pipar ke chhav ma [kavita] [krishna parkar]

कविता, बइठे पीपर के छांव मा, baithe pipar ke chhav ma, kavita, kawita, krishna parkar




भईया के ससुराल संगी,
भईया के ससुराल संगी,
गए रहेवं मैं बिहाव मा ।
मोला एक हसिना दिखगे,
बइठे पीपर के छांव मा ।।
कविता, बइठे पीपर के छांव मा, baithe pipar ke chhav ma, kavita, kawita, krishna parkar
आंखी म टुरी काजल आंजे,
पहिरे रहय चुरी हांथ मा ।
देख के मोर मन कहिस ,
बईठ जाववं का सांथ मा ।।
कविता, बइठे पीपर के छांव मा, baithe pipar ke chhav ma, kavita, kawita, krishna parkar
फुलवा कस मुस्कान रहय,
चंदा कस गोरी के चेहरा ।
माथा मा टिकली लगाए ,
अउ पहिरे पईरी पांव मा।।
कविता, बइठे पीपर के छांव मा, baithe pipar ke chhav ma, kavita, kawita, krishna parkar
मोला एक हसिना दिखगे,
बइठे पीपर के छांव मा ।।



बड़ सुघ्घर गोरी के चेहरा,
मन मा बस गे इमान से ।
चुरा के लेते दिल टुरी हा,
अब तो गएवं मै जान से ।
कविता, बइठे पीपर के छांव मा, baithe pipar ke chhav ma, kavita, kawita, krishna parkar
कहेवं गोरी ला जोड़ ले,
तोर नाव ला मोर नाव मा।
मोला एक हसिना दिखगे,
बईठे पीपर के छांव मा ।।
कविता, बइठे पीपर के छांव मा, baithe pipar ke chhav ma, kavita, kawita, krishna parkar

कृष्णा पारकर
9340404933
सीपत बिलासपुर छ. ग.

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