लहरादे तोर आंचल गोरी
लहरादे तोर आंचल गोरी,
मया के बादर बरस जाए ।।
मया भरे बरखा मा रानी ,
तन मन मोर भींग जाए ।।
महिना बितगे तोला देखे,
मन करथे के देख लेतेवं ।।
देख के तोला ये मोर हीरा,
मै आंखी ला सेक लेतेवं ।।
सुरता आथे होंठ के लाली ,
झुले नजर मा कान के बाली ।।
पांव के पईरी नींद जगाथे ,
का करवं अब तहीं बतादे ।।
तोर बिना जग सुन्ना लागे ,
जिनगी मोर बे सेवाद हे ।।
खिलखिलाके हंसना तोर ,
आज तक मोला याद हे ।।
आजा गोरी दिल मे समाजा,
ये सावन झन बित जाए ।।
लहरा दे तोर अचरा गोरी ,
मया के बादर बरस जाए ।।
**कृष्णा पारकर**
सीपत बिलासपुर छत्तीसगढ़
9340404933
कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।
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