लहरादे तोर आंचल गोरी lahrade tor anchal gori कविता कृष्णा पारकर krishna parkar kavita

लहरादे तोर आंचल गोरी lahrade tor anchal gori कविता kavita कृष्णा परमार krishna prmar
लहरादे तोर आंचल गोरी



लहरादे तोर आंचल गोरी,
       मया के बादर बरस जाए ।।
मया भरे बरखा मा रानी ,
        तन मन मोर भींग जाए ।।
लहरादे तोर आंचल गोरी lahrade tor anchal gori कविता kavita कृष्णा परमार krishna prmar

महिना बितगे तोला देखे,
       मन करथे के देख लेतेवं ।।
देख के तोला ये मोर हीरा,
       मै आंखी ला सेक लेतेवं ।।
लहरादे तोर आंचल गोरी lahrade tor anchal gori कविता kavita कृष्णा परमार krishna prmar

सुरता आथे होंठ के लाली ,
     झुले नजर मा कान के बाली ।।
लहरादे तोर आंचल गोरी lahrade tor anchal gori कविता kavita कृष्णा परमार krishna prmar
पांव के पईरी नींद जगाथे ,
      का करवं अब तहीं बतादे ।।
लहरादे तोर आंचल गोरी lahrade tor anchal gori कविता kavita कृष्णा परमार krishna prmar
तोर बिना जग सुन्ना लागे ,
        जिनगी मोर बे सेवाद हे ।।
खिलखिलाके हंसना तोर ,
        आज तक मोला याद हे ।।




आजा गोरी दिल मे समाजा,
        ये सावन झन बित जाए ।।
लहरा दे तोर अचरा गोरी ,
       मया के बादर बरस जाए ।।
लहरादे तोर आंचल गोरी lahrade tor anchal gori कविता kavita कृष्णा परमार krishna prmar

            **कृष्णा पारकर**
          सीपत बिलासपुर छत्तीसगढ़
           9340404933





कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ