दिल पे तड़प का छाया,dil pe tadap ka chhaya,[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

दिल पे तड़प का छाया है पहरा ।
याद आया है वह चेहरा सुनहरा ।


खिला खिला जो रहता था ।
           जैसे हो फुल गुलाब का।
अब उन पर है क्यों मायूसी ।
        बदला मिजाज जनाब का।



मेरे दिल मे रहकर ,
       धडकन मे बसता था ।
बातों से मेरी वह ,
       जी भर के हंसता था ।




कहता था मुझसे वह ,
        कभी छोड़ जाना नहीं ।
कसमो को याद रखना ,
         वादों को भुलाना नही ।


बिछड़ा वह ऐसे कि,ना मिला दोबारा ।
हर तरफ ढुंढा मैने , हर तरफ पुकारा ।


चला गया दूर , जख्म देकर गहरा ।
फिर याद आया वह चेहरा सुनहरा  ।

देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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