याद आया है वह चेहरा सुनहरा ।
खिला खिला जो रहता था ।
जैसे हो फुल गुलाब का।
अब उन पर है क्यों मायूसी ।
बदला मिजाज जनाब का।
मेरे दिल मे रहकर ,
धडकन मे बसता था ।
बातों से मेरी वह ,
जी भर के हंसता था ।
कहता था मुझसे वह ,
कभी छोड़ जाना नहीं ।
कसमो को याद रखना ,
वादों को भुलाना नही ।
बिछड़ा वह ऐसे कि,ना मिला दोबारा ।
हर तरफ ढुंढा मैने , हर तरफ पुकारा ।
चला गया दूर , जख्म देकर गहरा ।
फिर याद आया वह चेहरा सुनहरा ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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