गांव के गोरी,gaon ke gori,[Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

गांव के गोरी बड़ अलबेली ,
        टुरी हावय अबड़ नखरेली ।
 सम्हर के आथे मोर गली ,
         टुरी धरके दु झन सहेली ।।



लाली लुगरा पहिर के ना ,
        गोरी मोर सपना मा आथे ।
पईरी ला छनकावत रहिथे,
         चुरी ला अपन खनकाथे ।।




करिया काजर आंखी के ,
           करिया बादल के जईसे ।
नैना ले मऊहा के रस बरसे,
         खुद ला सम्भालवं कईसे ।।


चढ़ जाथे छत के ऊपर,
           भात साग ला रांध के ।
दिल ला मोर लेगे टुरी हा,
        अपन अचरा मा बांध के ।।



देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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