टुरी हावय अबड़ नखरेली ।
सम्हर के आथे मोर गली ,
टुरी धरके दु झन सहेली ।।
लाली लुगरा पहिर के ना ,
गोरी मोर सपना मा आथे ।
पईरी ला छनकावत रहिथे,
चुरी ला अपन खनकाथे ।।
करिया काजर आंखी के ,
करिया बादल के जईसे ।
नैना ले मऊहा के रस बरसे,
खुद ला सम्भालवं कईसे ।।
चढ़ जाथे छत के ऊपर,
भात साग ला रांध के ।
दिल ला मोर लेगे टुरी हा,
अपन अचरा मा बांध के ।।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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