भूल जाऊं तुमको याद तु ना आए ।
जीने नहीं देती जुदाई का गम ।
हर मंजर रूसवा कहां जए हम ।
मौत नही आया तो नींद तो आए ।
काश कि कोई ऐसा जादू हो जाए ।
प्यार करके तुमसे रो रहे हैं हम।
तु है हरजाई , हां तु है बेरहम ।
अपनी बर्बादी कोई कैसे भुलाए ।
काश कि कोई ऐसा जादू हो जाए ।
टुट गया दिल, आंख हुई है नम ।
जान चली जाए,फिर भी है कम ।
इश्क का कर्ज , कोई कैसे चुकाए ।
काश कि कोई ऐसा जादू हो जाए ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933
कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।


0 टिप्पणियाँ