कुछ भी नहीं जब,kuch bhi nhi jab,[Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

कुछ भी नहीं जब बीच हमारे ।
तो याद मुझे तुम आते क्यूँ हो ।


आकर फिर तुम मेरे सपनो मे ।
रात भर मुझको जगाते क्यूँ हो ।


आंखों से सारी बात कह देते थे ।
अब मुझसे नजरें चुराते क्यूं हो ।




जवाब तो होगा मेरे सवालों का ।
इस तरह मुझसे कतराते क्यूँ हो ।
                                                               



देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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