अभी कुछ दिन चलने दीजिये ।
एक मासूम सा सपना है मेरा,
ना तोड़िये इसे पलने दीजिये ।
जाने किस खुमार मे डूबा रहा ,
दिल ही तो है मचलने दीजिये ।
रात लेकर आएगी यादें तुम्हारी ,
इस तन्हा शाम को ढलने दीजिये ।
मिटा दो भले ही ये सारी रौनकें ,
पर चाहत का दिया जलने दीजिये ।
रूठने मनाने का ये सिलसिला ,
अभी कुछ दिन चलने दीजिये ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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