रूठने मनाने का ये सिलसिला ruthne manane ka ye silsila-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

रूठने मनाने का ये सिलसिला ,
अभी कुछ दिन चलने दीजिये ।



एक मासूम सा सपना है मेरा,
ना तोड़िये इसे पलने दीजिये ।

जाने किस खुमार मे डूबा रहा ,
दिल ही तो है मचलने दीजिये ।



रात लेकर आएगी यादें तुम्हारी ,
इस तन्हा शाम को ढलने दीजिये ।

मिटा दो भले ही ये सारी रौनकें ,
पर चाहत का दिया जलने दीजिये ।



रूठने मनाने का ये सिलसिला ,
अभी कुछ दिन चलने दीजिये ।


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                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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