रंग जीवन के (घनाक्षरी :-तोषण दिनकर)


घनाक्षरी
-रंग जीवन के

रंग अंग भीगे रंग लेकर नई उमंग,
दिन रहो होली रात दिवाली मनाइये।

सरसो के रंग लिए हियरा जो भंग 
पिए,
आम बन डाल पर मन को लुभाइये।

हरी हरी धरती ये शीतल जो करती ये,
झरझर नदियों सा,तरंग जगाइये।

सुख दुख संग लिये,जीवन में रंग लिये,
बांट चले भाईचारा रंग ये चढ़ाइये।

-तोषण दिनकर

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ