विश्व किताब दिवस म नानकुन कुण्डलियाँ
बाँटे सगरो बात सुन,जेकर निही हिसाब।
हवय ज्ञान के कोठरी,कहिथे सखा किताब।
कहिथे सखा किताब,सुनव गा संगी भइया।
बने गोठ सब राख,गलत ला देवव तिरिया।
कह दिनकर कविराज,गजब के बतिया छाँटे।
बानी रोठ किताब ,ज्ञान के सागर बाँटे।
-तोषण दिनकर

1 टिप्पणियाँ
Nice
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