* बादर के डोला मा *
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बादर के डोला मा बइठके,
बरसा रानी आवत हे।
सगुन के मंगल बाजा बाजे,
गरजे बादर बजावत हे।।
चमक चमक के बिजली रानी,
सुग्घर झालर सजावत हे।
इन्द्र धनुष ह मंढप सजाये,
दुलहीन धरती मुस्कावत हे।।
छम छम छम बूँद परत हे,
पहिरे पइरी कस बाजत हे।
डारा पाना रुख राई मिलके,
सोला सिंगार ल साजत हे।।
चिरई चिरगुन फांफा मिरगा,
मिलजुल के सब नाचत हे।
अइसे मोला जनावत हावय,
एहू मन बरतिया जावत हे।।
चिखला माटी के तेल हरदी,
गोड़मुड़ ले लगावत हे।
बनके माहलिया "नोहर"संगी,
बरतिया ल परघावत हे।।
बरतिया ल परघावत हे..
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नोहर आर्य
फरदडीह, (डौंडीलोहारा) जिला बालोद,छ.ग।

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