काम-बुता चलत हे पेल-ढपेल के ।।
आए हे जबले करोना बीमारी ।
मंहगाई बाढ़ गेहे होगे लाचारी ।
काम बुता चलत हे पेल-ढपेल के ।।
लॉकडाउन मे आएंव तोर घर ।
चटनी समोसा लाएंव तोर बर ।
हवा झन खवाबे तै मोला जेल के ।।
काम-बुता चलत हे पेल-ढपेल के ।।
गोरी मोर मया के लाज रख ले ।
चाही त दु किलो प्याज रख ले ।
का पाबे तै मोर दिल संग खेल के ।।
काम-बुता चलत हे पेल-ढपेल के ।।
चल मानले कहना दाऊ बघेल के ।।
बेच ना तहुं, अब गोबर सकेल के ।।
काम-बुता चलत हे पेल-ढपेल के ।।
**कृष्णा पारकर**

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