कविता

कोनो के संग, जब नैना लड़ जाथे ।।
ये दुनियावाले मन, पाछु पड़ जाथे ।।

फेर दुनिया के कोनो डर नई रहय ।।
जब कहुं प्यार के कांटा गड़ जाथे ।।

तोर मया के, अईसे कांटा गड़े हौं ।।
तोर बर दिल मे प्यार उमड़ जाथे ।।

'लाली सूट' पहिर के जब आथस ।।
देखके तोला रे धड़कन बढ़ जाथे ।।
तोर बर दिल मे प्यार उमड़ जाथे ।।

जब मुस्कुराथस तै देख के मोला ।।
104°डिगरी के बुखार चढ़ जाथे ।।
तोर बर दिल मे प्यार उमड़ जाथे ।।

         **कृष्णा पारकर**

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