कविता

निकले हे चांद, रात भी जवान हे ।
आजा ना गोरी, मऊका सनान हे ।

नजर झुकाए चुप-चाप खड़े हस ।
मोला भी बता कहां तोर ध्यान हे ।

मोर मनमंदिर मे तोला बसाए हौं ।
तोर मया मोर-बर पूजा समान हे ।

दौलत के चश्मा, निकाल के देख ।
तोरबर पथरा,मोर बर भगवान हे ।

देख-देख के तोला सांस चलत हे ।
तोर बिना टुरी, मोर मरे बिहान हे ।

समय निकालके आ जाबे रे गोरी ।
तोर संग ददरिया गाए के प्लान हे । 😎

          **कृष्णा पारकर**

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