*तोर मया मा मँय हँव दिवाना*
नाँव ल लेके मँय मर जाहूँ ,
छोड़ मोला जब जाबे तँय।
तोर मया मा मँय हँव दिवाना ,
पाछू फेर पछताबे तँय।
पानी बिना मछरी कहाँ जाहूँ ,
झिन मोला तरसाना ओ।
नदिया नरवा डोंगरी पहाड़ी ,
घूमँव बनके दीवाना ओ।
सुतन नइ देवस सारी रतिहा ,
अउ कतका तडपाबे तँय।
तोर मया मा मँय हँव दीवाना ,
पाछू फेर पछताबे तँय।
मोर जिनगी हे कारी अमावस ,
चंदा बनके करदे अंजोर।
तोर पीरीत बर तरसत हावँव ,
जइसे अमरित बर हे चकोर।
मया के बरखा बनके गुंईया ,
पल छिन पल बरसाबे तँय।
तोर मया मा मँय हँव दीवाना ,
पाछू फेर पछताबे तँय।
धधकत जिवरा तोर मया बर ,
खावत हँव किरिया मान ले।
प्रेम परिच्छा झन ले गोरी ,
दिल के दरद ला जान ले।
चाहहूँ तोला खुद ले जादा ,
मया अइसन कहाँ पाबे तँय।
तोर मया मा मँय हँव दीवाना ,
पाछू फेर पछताबे तँय।
©®
तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
6/11/25//9.18pm
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