सुवागीत
तरी हरी नाहना मोर नाहना सुवा ना रे
छंइया होगे निरदइया
छोंड़ के गये परदेशी सुवा ना रे
छंइया होगे निरदइया
बाहर बटोरेंव मैं अंगना लिपाऐंव ओ
सजना मोर आही संगवारी
तुलसी के चौंरा तीर करसा सजाऐंव दीदी
आगे हे दीया देवारी
तरी हरी नाहना मोर नाहना सुवा ना रे.......
दू दिन के चार दिनिया लागै दीदी मोर
महिना बछर बिलमागे
जलदी आहूं कहिके निकले सुवा संगी
सुरता मोर कइसे भुलागे
तरी हरी नाहना मोर नाहना सुवा ना रे.......
जलदी से आजा मोर छंइया बिदेशी के
जोहत रहिथौं पारे पाटी
नैना बिछाये हँव सुरता लमाये हँव
रहिथौं दीया बिन जस बाँती
तरी हरी नाहना मोर नाहना सुवा ना रे.......
तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
9575070689
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