दंतेश्वरी के पुजा करइया

दंतेश्वरी के पुजा करइया


दंतेश्वरी के पुजा करइया तैहा,जाबे कहां रे .........2

तैहस आ दि--वा-सी , सु-घ्घर हल्बा जाति.......
मोर बस्तर रवहईया तैहा, जाबे कहां रे तैहा जाबे कहा रे

दंतेश्वरी के पुजा करइया तैहा,जाबे कहां रे .........2

खाथस चटनी बासी, सबले सु-घ्घर जाति......
दन्तेश्वरी के सेवा बिन मुक्ति पाबे कहा रे,तैहा जाबे कहा न
दंतेश्वरी के पुजा करइया तैहा, जाबे कहां रे .........

कतका जोखिम तै उठाये, दुख पिरा ला नइ बताऐ...........
बस्तर भुईया ला छोडके तैहा, जाबे कहां रे....तैहा जाबे कहां न
दंतेश्वरी के पुजा करइया तैहा, जाबे कहां रे ........2.

मनमा कुछु नई तोर आस, तोर जिवंन हे त्याग........
रिश्ता नाता ला भुलाके तैहा, जाबे कहां रे तैहा जाबे कहां न
दंतेश्वरी के पुजा करइया तैहा,जाबे कहां रे .........


सब झन के तै मितान, तलवार ढ़ाल तोर निशान .........2
मोरे बलिदानी गैंदसिग ला ला पाबों कहा रे तोर कस पाबो कहा न
दंतेश्वरी के पुजा करइया तैहा, जाबे कहां रे .........2

कवि/लेखक/गीतकार 
आर्यन चिराम 
9407749514
kodagaon kanker 

कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ