तिपत भोभंरा, जरत घाम हे।
चल जी अभी भारी काम हे ।।
घाम के मारे पसीना ह
भारी चुचवावत हे ।
ए बईरी घाम के कारन
कुछू नई सुहावत हे।।
डोकरा बबा ह चटनी संग
बासी ल धडकावत हे ।
ऐला देख डोकरी दाई ह
मुसुर- मुसुर मुसकावत हे ।।
पोप पोप आवाज सुनके
टुरा के मन ह ललचावत हे।
खीसा में पईसा नई हे कहिके
दाई ह टूरा ल खीसियावत हे॥
जब ले लगे हे गरमी के महीना
टुरी मन भारी मेछरावत हे।
घेरी बेरी मोबाइल कोचक के
नेट भारी चलावत हे।।
ऐला देख डोकरा बबा ह
टुरी 👱🏻♀ल भारी चिल्लावत हे।
चुपचाप रहा डोकरा 👴🏻कहिके
उल्टा बबा ल चमकावत हे।।
🙏🙏आर्यन चिराम🙏🙏

0 टिप्पणियाँ