पति दिवस

( पति दिवस पर विशेष )
सब पति एको दिन जुरीयाई का.
मिल के पति दिवस मनाई का ........1
बहुत होगे अब.
हर जुल्म के हद होथे.
गोसीया जागथे सुवारी सोथे.
तभो ले तो घेरी बेरी रोथे.
एको दिन हमु आंसु बहाई का......2
सब पति एको दिन जुरीयाई का ....
मिल के पति दिवस मनाई का ......
अब तो  बंद करव ग.
भात साग रंधाई ल.
बरतन के मंजाई ल .
कपड़ा के धोवाई ल.
रोज रोज गुर्राथे वोहा
हमु एको दिन हमु गुर्राई का......3
सब पति एको दिन जुरीयाई का...
मिल के पति दिवस मनाई का....
अब तो अईसन हाल हे.
अपन घर म अपने होथे कल्लाई.
हमी कमाई.हमी लुलवाई.
तभो रोज होथे वोकरे गुन गवाई.
चला तो,आपात बईठक बुलाई का.....4
सब पति एको दिन जुरीयाई का...
मिल के पति दिवस मनाई का .....
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यह लेखनी कविता internet से  प्राप्त किया गया है
कवि का नाम नही पता है?

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