आगे सावन
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आगे सावन रिमझिम रिमझिमचारो कोती फुहार
डोली डांगरी तरिया भरगे
मेचका पारे गोहार
अइसे लागे भुइंया जइसे
करत हे सिंगार
आगे सावन,,,,,,,,

घुमुड़ घामर गरजे बादर
चले किसान धरके नांगर
ओहो तोतो चुचकारत बइला
खेती जेकर जीयत जांगरकमरा खुमरी ओढ़ ले संगी
जिनगी हवय सार।
आगे सावन,,,,,,,,,

हरियर हरियर डारा पाना
बनिहारिन निकले गावत गाना
सांवा भदऊर निमार ले हाना
पाबे सोनहा आरूग दाना
धरती सेवा किसान सेती
करथे सबो जीव के उपकार
आगे सावन,,,,,,,,,,।
साहिल नायक
कवि/गीतकार/शिक्षक
शास,माध्य,शा,--करैहा
वि,खं,--नगरी,धमतरी
मोबा,9340389771
Email-sahilnayak8283@gmail.com
कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।
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1 टिप्पणियाँ
Nice
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