गिरत हे पानी अउ लागत हे
घांम |
घर मा रहाव की मै खेत कोति
जांव |
अपन के पीरा ला कोन ला
बतांव ||
लादू के ट्रेक्टर मा,
येसो के बत्तर मा, पानी के
चक्कर मा,
महू हा धाने बोवा डारेव न ||
घरे मा रथो त डोकरी झंझेटे |
खेते मा रथो त बादर गुरेरे |
खायेला देके मुहु मुरेरे ||
रोजे दिन के गारी खवई मा,
येसो के बत्तर मा, पानी के
चक्कर मा,
महू हा धाने बोवा डारेव न ||
कर्जा छुटत महू हा घुरेंव ||
उठत बैठत चिंता करई मा,
येसो के बत्तर मा, पानी के
चक्कर मा,
महू हा धाने बोवा डारेव न ||
गीतकार/कवि/लेखक
आर्यन चिराम
कोदागाँव कांकेर
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