गिरत हे पानी अउ लागत हे घांम आर्यन चिराम [कविता]girat he pani au lagat he gham .aaryan-chiram[kawita]

खेती किसानी कर्जा
खेती किसानी कर्जा kheti kisani karja
गिरत हे पानी अउ लागत हे घांम |
घर मा रहाव की मै खेत कोति जांव |
अपन के पीरा ला कोन ला बतांव ||
लादू के ट्रेक्टर मा,
येसो के बत्तर मा, पानी के चक्कर मा,
महू हा धाने बोवा डारेव न ||

खेती किसानी कर्जा kheti kisani karja
खेती किसानी कर्जा kheti kisani karja
घरे मा रथो त डोकरी झंझेटे |
खेते मा रथो त बादर गुरेरे |
खायेला देके मुहु मुरेरे ||  
रोजे दिन के गारी खवई मा,
येसो के बत्तर मा, पानी के चक्कर मा,
महू हा धाने बोवा डारेव न ||

खेती किसानी कर्जा kheti kisani karja
खेती किसानी कर्जा kheti kisani karja करत किसानी कर्जा मा बुडेव |
कर्जा छुटत महू हा घुरेंव ||
उठत बैठत चिंता करई मा,
येसो के बत्तर मा, पानी के चक्कर मा,
महू हा धाने बोवा डारेव न ||

खेती किसानी कर्जा kheti kisani karja







गीतकार/कवि/लेखक 
आर्यन चिराम 
कोदागाँव कांकेर  


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