आगे आषाढ़ के महिना गोरी ।
डारा पाना हा हरियावत हे रे ।
झिमिर झिमिर पानी गिरत हे ।
मन मा पियास जगावत हे रे ।
देख के तोला जम्मो टुरा मन ।
आनी बानी गोठियावत हे रे ।
चढ़ती जवानी देख के रानी ।
सबो के लार चुचुआवत हे रे ।
मोर मुंह ले बोली नइ फुटय ।
छाती मोर धकधकावत हे रे ।
तोर प्यार मा बइहा होगेवं मै ।
दाई ददा हा खिसियावत हे रे।
ए गोरी तोर गोरी सुरतिया ।
मन ला मोर भरमावत हे रे ।
तोर कटारी नैना हा मयारू ।
दिल मा छुरी चलावत हे रे ।
आजा गोरी मोर जिनगी मा ।
जिनगी हा नइ पहावत हे रे ।
कइसे तोर ले मिलना हो ही ।
कुछु समझ नइ आवत हे रे ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933
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