देख तो सही तेरी dekh to sahi teri[Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

देख तो सही तेरी मोहब्बत,
         मेरा क्या हाल कर रही है ।
कैसे हूँ मैं जिंदा अब तक ,
       जिन्दगी सवाल कर रही है ।



क्यूँ ना देखा तुमने मुड़कर ,
       आखिर मै तेरा दिवाना था ।
प्यार क्या किया तुमसे मैने,
        जान से मुझको जाना था ।



देखो याद तुम्हारी मुझको ,
         अब  बेहाल  कर रही है ।
कैसे हूँ मैं जिंदा अब तक ,
       जिन्दगी सवाल कर रही है।





पहले तो मैं समझता था ,
        कि पानी आग बुझाती है ।
अब जाके मालुम हुआ है ,
        बारिश आग भड़काती है ।
   


देखो ना अब बारिश भी ,
           क्या कमाल कर रही है ।
धिरे धिरे इश्क तुम्हारी ,
        मुझको हलाल कर रही है ।




                                      
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                            कृष्णा पारकर
                         बिलासपुर सीपत
                    +91 93404 04933
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