आंसू बनकर ansu bankar[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

आंसू बनकर तुम कहीं,
         नज़रों से ना गिर जओ ।
इसलिए ही मैंने तुम्हे ,
          नजरों में बसाया नहीं ।।



दिल में बसाके रक्खा था,
         ये राज भी छुपाया नहीं ।
पर जाने कब तुम दुर गए,
        मेरी समझ में आया नहीं ।।



ऐसा एक इंसान बताओ,
         जिसने दिल लगाया नहीं ।
दिल लगा के "दिलजला",
       दिल की ठोकर खाया नहीं।।



नजरों का वह मिलना भी,
         जब हम तुम अनजान थे ।
दिलकश लम्हा यादों की ,
        मै ही क्यों भुल पाया नहीं ।।



एक पल भी ना गुजरा ऐसा,
        कि तेरा खयाल आया नहीं।
पर ये बात अलग है कि,
      कभी मैने कुछ बताया नहीं।।



जाने वाले ये सुनता जा,
         तु ही लौट के आया नहीं ।
दरवाजा भी खुला ही था,
        दिया भी मैने बुझाया नहीं।।


देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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