ये विनती सुनो किसान की ।।
बिन पानी के जीवन चलना ।
मुमकिन ही नही इंसान की ।।
रस्ता देख रही ये धरती ।
बस तेरे ही वरदान की ।।
प्यारे बादल अब तो बरसो ।
ये विनती सुनो किसान की ।।
बिन तेरे उपजे , कैसे अनाज।
भरना है पेट, पुरे जहान का ।।
आन पड़ी है जरुरत तुम्हारी ।
अब संग छोड़ो आसमान का।।
प्यारे बादल अब तो बरसो ।
हालत तो देखो किसान का ।।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933



0 टिप्पणियाँ