सुरता करके , झन तै रोबे ।
मन मा तोर , धीरज थरबे ।
झन कुछु के फीकर करबे ।
छंट जाही गोरी दुख के बादर ।
अब्बड़ गहिरा मया के सागर ।
बाग मा फुल के खिलना होही ।
जल्दी तोर मोर , मिलना होही ।
बात ला रानी , तै मोर पतियाले ।
नइये भरोसा त किरिया खवाले ।
जल्दी मै रानी तोर मांग सजाहुं ।
दुल्हिन बनाके मै तोला ले आहुं ।
मया ला कुछ दिन उधार करले ।
बस चार महिना इंतजार करले ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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