बढिया रहिबे badiya rhibe-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

बढिया रहिबे , जइसे होबे ।
सुरता करके , झन तै रोबे ।



मन मा तोर , धीरज थरबे ।
झन कुछु के फीकर करबे ।

छंट जाही गोरी दुख के बादर ।
अब्बड़ गहिरा  मया के सागर ।



बाग मा फुल के खिलना होही ।
जल्दी तोर मोर , मिलना होही ।

बात ला रानी , तै मोर पतियाले ।
नइये भरोसा त किरिया खवाले ।



जल्दी मै रानी तोर मांग सजाहुं ।
दुल्हिन बनाके मै तोला ले आहुं ।

मया ला कुछ दिन उधार करले ।
बस चार महिना इंतजार करले ।


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                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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