तहीं जान का मया के मोहनी छींचे ।
भटकत रहिथे दिल तोरे आगे पीछे ।

मया मे मन मोर बोहावय धारे धार ।
प्रेम-गीत सुनावत हे डोंगरी कछार ।
सीधा-साधा मन मोर समझय नही ।
पिरित के डोरी, मोला काबर खींचे ।

तहीं जान का मया के मोहनी छींचे ।

पक-पक ले पाऊडर, लगाए रहे तै ।
मोर गली, घुमे खातिर, आए रहे तै ।
तै मोला भले ही, अंताज नही पाए ।
देखत रहेंव टुरी तोला आंखी भींचे ।

तहीं जान का मया के मोहनी छींचे ।

तोर सुरता मे रानी मोर दिन पहाथे ।
रात-रात भर टुरी तोर सपना आथे ।
डर लगथे तोर सपना देखत देखत ।
गिर झन जावंव मै खटिया के नीचे ।😜

तहीं जान का मया के मोहनी छींचे ।
आर के रावटे

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