हावय जम्मो किसान ।
बरसत नइहे पानी ,
जीव होगे हलकान ।
देरी झिन होवय अब,
खेती अउ किसानी मा ।
आशा तो बँधाए हे ,
अषाढ़ के पानी मा ।।
दु दिन के बरसा मा,
फुल पान हरियाए हे ।
लेकिन अभी भुईयां के,
प्यास नइ बुझाए हे ।।
झर झर ले गिर के ,
तन मन ला भिंगादे ।
जम्मो किसान मन के,
भाग्य ला तै जगादे ।।
छत्तीसगढ़ के माटी मा,
सुघ्घर लहरावय धान ।
जम्मो किसान मन ला ,
दे दे अतेक वरदान ।।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933



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