ना कोई बात ना ही गिला रक्खा है na koi baat na[Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

ना कोई  बात ना ही गिला  रक्खा है ।
कैसा गजब तुमने सिलसिला रक्खा है ।



वजह तो बताओ अपनी खामोशी का ।
किस बात पे तुमने मुंह फुला रक्खा है ।


उजाला बन कर बिखरे हो मेरे दिल मे ।
इस कदर यादों का दिया जला रक्खा है ।




दाग सा लगा है मेरे दिल मे तेरे छुने का ।
सबसे कहता फिरता हूं धुला रक्खा है ।


मुश्किल सा लगता है इरादों पर टिकना ।
यादों की तूफ़ान ने जो हिला रक्खा है ।


मुमकिन हो तो चले आना ऐ मुसाफिर ।
दरवाजा तो मैंने आज भी खुला रक्खा है।



                                        
देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ