घर भी नही रहने लायक ।
किससे कहुं और क्या कहुं,
बचा क्या है कहने लायक ।
कितना रोया कितना तड़पा,
इन सब का हिसाब नही है ।
इश्क ने मुझको क्या दिया ,
सवाल है पर जवाब नहीं है ।
वो लम्हा जब तुम साथ भी ,
मौसम कितना सुहाना था ।
हर पल , हम तुम हंसते थे ,
वो खुशियों का जमाना था ।
याद तो तुम्हारी आज भी बहुत आती है !!
पर वो कहते हैं ना !!
मोहब्बत भी जरूरी थी !!👫
बिछड़ना भी जरूरी था !!🚶💃
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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