अइसे का होगे तोर मजबुरी ।
रंग रंग के तै सपना देखाके ।
छोड़ दिये तै दिवाना बनाके ।
रहिगे कहानी रे हमर अधुरी ।
अइसे का होगे तोर मजबूरी ।
नींद उड़ाके, तै कहां लुकाए ।
छोड़ के गए तै बिना बताएं ।
एक बात पुछना हावे जरूरी ।
अइसे का होगे तोर मजबुरी ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933
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