काबर मैं तोर संग kabar mai tor sang[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

काबर मैं तोर संग नैना लड़ाएवं ।
बरसत पानी मा , दिया जलाएवं ।।



सीधा साधा दिल मोर,
         धोखा नइ जानिस ।
कतको समझाएवं मै,
         कहना नइ मानिस ।

तोरे दिवाना हे , कतको खिसियाएवं।
बरसत पानी मा , दिया जलाएवं ।।



चढ़े जवानी जोर मा,
           लागे तै बड़ प्यारी ।
तोरो रज़ामंदी होगे ,
          बनगे तोर मोर यारी।।

मन के मोर पीरा,तोला गोहराएवं।
बरसत पानी मा , दिया जलाएवं ।।



मया तोला करके, मै बईहा कहाएवं।
काबर मैं तोर , संग नैना लड़ाएवं ।।

मै अपने जिनगी मा आगी लगाएवं ।
मया तोला करके मैं आंसू बोहाएवं।।



मोर मन के मंदिर मा तोला बईठाएवं।
तोर संग मा जिनगी के सपना सजाएवं।।

तोर मोर बात ला,सबसे छुपाएवं।।
मै अपन करनी मा,बड़ पछताएवं ।।


काबर मैं तोर संग , नैना लड़ाएवं ।
सुघ्घर जिनगी मा , आगी लगाएवं।।

           देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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