सुन्दर है संसकृति, क्या कहने परिवेश की।
निर्मल पावन नदियों की,
धारा निश दिन बहती है ।
हम सा जग में कोई नहीं,
ये सारी दुनिया कहती है ।
साम सवेरे सजती है ,
घर मे पूजा की धालियां ।
घुंघट मे हो गोरी फिर भी,
लाज की रहती लालीयां।
खून से सींचा है धरती को,
मेरे देश के वीर जवानों ने ।
हरियाली लायी धरती पे ,
मेहनत कर के किसानो ने।
देश मेरा ये हर कदम पर ,
फुलता और फलता रहे ।
कामयाबी की शिखर पर,
निश दिन यूं ही चलता रहे।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


0 टिप्पणियाँ