यूं ही नहीं महकती है you hi nhi mahkti hai[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

यूं ही नहीं महकती है , मिट्टी मेरे देश की ।
सुन्दर है संसकृति, क्या कहने परिवेश की।



निर्मल पावन नदियों की,
        धारा निश दिन बहती है ।
हम सा जग में कोई नहीं,
        ये सारी दुनिया कहती है ।



साम सवेरे सजती है ,
        घर मे पूजा की धालियां ।
घुंघट मे हो गोरी फिर भी,
         लाज की रहती लालीयां।

खून से सींचा है धरती को,
        मेरे देश के वीर जवानों ने ।
हरियाली लायी धरती पे ,
         मेहनत कर के किसानो ने।



देश मेरा ये हर कदम पर ,
         फुलता और फलता रहे ।
कामयाबी की शिखर पर,
        निश दिन यूं ही चलता रहे।


     देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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