अइसे का होगे , मोर ले खता ।।
काबर तै रिसाए , मुह ला फुलाए।
चेहरा तोर हावय ,काबर मुरझाए।।
तोर उदासी गोरी,मोला नइ सहाए ।
देखे बिना तोला ,जीव नइ जुड़ाए।।
सुते नइ देवय , सुरता हा तोर ।
गोरी तोर चुप्पी,जीव लेथे मोर ।।
मन के कलपना , बिन कहे जान जा।
झिन सता मोला, चल अब मान जा ।।
निच्चट मैं भोकवा,तोला अबड़ सताए हौं।
तोर दिल के हाल,अभी समझ पाए हौं ।।
गोरी रे जियत भर, मया तोला करहुं ।
तोर खातिर जीहुं,तोर खातिर मरहुं ।।
जिनगी हे गोरी , अब तोर हवाले ।
छोड़ दे मोला , के चाहे अपनाले ।।
मान जा ना गोरी रे कहना ला मोर ।
तोला किरिया मोर,आगे मर्जी तोर।।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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