कुछ समझ में आता नहीं ,तब इन्सान किधर जाए ,
मेरा जीवन हो गया है ,एक भयानक रात सा,
दुआ तुम भी करना दोस्त, किये रात गुजर जाए ,
लाख खताएं माफ की पर अब थोड़ा मुश्किल है ,
कैसे उसे कोई माफ करें जो नजरों से गिर जाए ,
पहले मेरी ख्वाहिश थी दुनिया का नजारा कर लूँ ,
आरजु है दिल की अब मै तन्हा ही गुजारा कर लूँ,
गुमसुम हाेकर देखा है मैंने चीखते हुए जख्मो काे ,
अब मुझसे ना हाेगा ,फिर वही हाल दाेबारा कर लूँ
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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