शायद इतना इसलिए , मै लाचार हो गया ।
कच्ची थी यारी तुम्हारी, झुठी थी मोहब्बत ।
तभी जरा सी बात पर , यूं तकरार हो गया ।
सोंच के मै शर्मिंदा हूँ, तुमसे दिल क्यूँ लगाया।
अपना ही दिल तोड़कर , गुनाहगार हो गया।
दिल भी ये नादान था, जो आया तेरी बातों में।
अब ना करना कृष्णा, गलती जो इस बार हो गया।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933
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