पापा मुझे पढ़ाना इतना ,
के फौजी बन जाऊं मै ।।
जिस मिट्टी मे पला बढ़ा ,
उसके ही काम आऊं मै ।।
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हांथों मे बंदूक लेकर ,
सरहद पर डट जाऊं मै ।।
देश ये मेरा है वीरों का,
दुनिया को बतलाऊं मै ।।
पापा मुझे पढ़ाना इतना ,
के फौजी बन जाऊं मै ।।
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नही है बनना ऐसा नेता,
जो होते हैं रिश्वत खोर ।।
फौजी ही है बनना मुझे ,
जितनी लग जाए जोर ।।
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अब है यही तमन्ना मेरा,
कफन तिरंगा पाऊं मै ।।
देश की खातिर मरके भी,
अमर शहीद कहाऊं मै ।।
पापा मुझे पढ़ाना इतना ,
के फौजी बन जाऊं मै ।।
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कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933
कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।
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