जिनगी ला करके वीरान,jingi la karke viran,[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

जिनगी ला करके वीरान झन जा ।
बात ल थोरकुन ,तै मान झन जा ।



गलती ला मोर गोरी माफ तो करदे,
हो जाही सबकुछ आसान झन जा ।




पगला हौं गोरी तोर मया नइ जानेवं,
लेना मै पकड़त हौं कान झन जा ।


तोर बीना रानी टुट के बीखर जाही,
दिल हावय शीशा सामान झन जा ।


तोर बीना मर जाहुं जानथस ना तै ,
निकल जाही मोर  परान झन जा ।
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                                                                      कृष्णा पारकर
                                                                     बिलासपुर सीपत
                                                                   +91 93404 04933
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