अब तक मुझे याद रहा ।
थरथराते होंठों पर ,
मिलने का फरियाद रहा ।
कितना समझाया था,
दूर रहना मोहब्बत से ।
पर ये पागल दिल भी ,
पहले से नामुराद रहा ।
पहले तो थी तन्हाईयाँ ,
हर तरफ अब सोर है ।
तेरे सारे रंजो-गम से ,
मेरा जहाँ आबाद रहा ।
मिलती ना निगाहें तो ,
यूँ आंसू आज ना गिरते ।
राहे-इश्क चलते चलते ,
कृष्णा भी गमसाद रहा ।
प्यार वफा सब धोखा है
क्यूं नहीं समझता दिल ।
लाखों दिलों को तोड़कर ,
ये इश्क जिंदाबाद रहा ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


0 टिप्पणियाँ