तेरे इश्क का सितम tere ishq ka sitam[Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

तेरे इश्क का सितम ,
        अब तक मुझे याद रहा ।
थरथराते होंठों पर ,
        मिलने का फरियाद रहा ।




कितना समझाया था,
           दूर रहना मोहब्बत से ।
पर ये पागल दिल भी ,
           पहले से नामुराद रहा ।




पहले तो थी तन्हाईयाँ ,
           हर तरफ अब सोर है ।
तेरे सारे रंजो-गम से ,
           मेरा जहाँ आबाद रहा ।


मिलती ना निगाहें तो ,
        यूँ आंसू आज ना गिरते ।
राहे-इश्क चलते चलते ,
        कृष्णा भी गमसाद रहा ।


प्यार वफा सब धोखा है
         क्यूं नहीं समझता दिल ।
लाखों दिलों को तोड़कर ,
          ये इश्क जिंदाबाद रहा ।


                                          
देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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