कब चढ़बे तै डेहरी, मोर घर के दुआरी के ।।
सात जनम के का भरोसा,
बस ये ही जनम कट जाए,
जियत भर ले मोर कान म,
तोर मीठ मीठ बोली सुनाए,
फुल फुलवारी रस्ता देखे,मोर कोला बारी के।
कब चढ़बे तै डेहरी , मोर घर के दुआरी के ।।
दिन बितगे कतका,कतको बित गे रात,
नइ रहाए तोर बीना,बड़ मुश्किल हालात,
तहुं तो हावस राजी अउ महुं हाववं राजी,
तो फेर अब फिकर करे के का हे बात,
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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