चर्चा चलत हे गोरी रे charcha chalat he gori re[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

चर्चा चलत हे गोरी रे,गाँव मे हमर यारी के ।
कब चढ़बे तै डेहरी, मोर घर के दुआरी के ।।



सात जनम के का भरोसा,
बस ये ही जनम कट जाए,
जियत भर ले मोर कान म,
तोर मीठ मीठ बोली सुनाए,



फुल फुलवारी रस्ता देखे,मोर कोला बारी के।
कब चढ़बे तै डेहरी , मोर घर के दुआरी के ।।



दिन बितगे कतका,कतको बित गे रात,
नइ रहाए तोर बीना,बड़ मुश्किल हालात,
तहुं तो हावस राजी अउ महुं हाववं राजी,
तो फेर अब फिकर करे के का हे बात,


देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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