जिनगी हवय फूल बरोबर
----------------------------------------
जिनगी हवय फूल बरोबर
महर महर ममहावव
धरम करम के दीया जलाके
तन मन ल उजरावव
-काड़ी कचरा चिखला माटी
झन मानव कोई ल हाथी चॉटी
निरधन कोन काकर महल अटारी
गंवटिया होथे देखत भिखारी
आहन सुघ्घर सरग धरती म
मानुस तन संहरावव,
जिनगी,,,,,,
एके बगिया के हम सोन चिरईया
झन बनव कोनो गोड़ तिरईया
खाँदे म खाँद संग संग चलना हे
सुख के साथी दुख के साथी कतको बिपदा ल हरना हे
मया के बोली बोल के
खोंदरा एक बनावव
जिनगी,,,,,
✍साहिल नायक✍
गीतकार/शिक्षक
माध्यमिक शाला-करैहा
वि•खं-नगरी,जि,-धमतरी,छ,ग
9340389771


0 टिप्पणियाँ